ट्रेन में सफर करने वालों के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी है। मिडिल बर्थ (Middle Berth) को लेकर रेलवे का स्पष्ट नियम है, जिसके तहत सोने का समय तय किया गया है। अगर आप स्लीपर या एसी 3-टियर कोच में यात्रा करते हैं, तो जान लें कि निर्धारित समय के बाद मिडिल बर्थ नीचे करनी होगी। आइए समझते हैं रेलवे का आधिकारिक नियम क्या कहता है।
क्या है मिडिल बर्थ का नियम?
Indian Railways के नियमों के अनुसार स्लीपर और 3-टियर कोच में:
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रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक मिडिल बर्थ खोलकर सोया जा सकता है।
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सुबह 6:00 बजे के बाद मिडिल बर्थ फोल्ड कर देना जरूरी है।
इसका उद्देश्य नीचे की सीट पर बैठे यात्रियों को दिन के समय बैठने की सुविधा देना है।
क्यों बनाया गया यह नियम?
ट्रेन के स्लीपर कोच में तीन स्तर की बर्थ होती हैं—लोअर, मिडिल और अपर। दिन में लोअर सीट पर बैठने का अधिकार उस सीट के यात्री का होता है।
अगर मिडिल बर्थ दिन में भी खुली रहे, तो नीचे बैठने वाले यात्री को असुविधा होती है। इसलिए रेलवे ने समय तय किया है ताकि सभी यात्रियों को बराबर सुविधा मिल सके।
क्या कोई जुर्माना है?
आमतौर पर यह आपसी समझ और कोच अटेंडेंट/टीटीई की निगरानी में लागू होता है। यदि कोई यात्री नियम का पालन नहीं करता और विवाद की स्थिति बनती है, तो TTE हस्तक्षेप कर सकता है।
यह नियम यात्रियों की सुविधा और अनुशासन बनाए रखने के लिए है।
किन कोच में लागू है यह नियम?
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स्लीपर क्लास (SL)
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एसी 3-टियर (3A)
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एसी 2-टियर (2A) में भी समान शिष्टाचार लागू
चेयर कार या साइड बर्थ पर यह नियम लागू नहीं होता।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह
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रात 10 बजे के बाद ही मिडिल बर्थ खोलें
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सुबह 6 बजे के बाद बर्थ फोल्ड कर दें
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सहयात्रियों के साथ समन्वय बनाए रखें
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किसी भी विवाद की स्थिति में TTE से संपर्क करें
निष्कर्ष
रेलवे के नियम के अनुसार मिडिल बर्थ पर सोने का समय रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक तय है। इसके बाद बर्थ को फोल्ड करना अनिवार्य है, ताकि अन्य यात्रियों को बैठने में सुविधा मिल सके। यात्रा के दौरान नियमों का पालन करने से सफर आरामदायक और विवाद-मुक्त रहता है।